उन डॉक्टरों के लिए जिन्होंने सबसे ज्यादा कमजोर लोगों की सेवा करना चुना है।
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एक अनूठा मौका भारत के दुर्गम कम संसाधन वाले अस्पतालों में प्रैक्टिस का अनुभव हासिल करने का





चित्र सौजन्य: पुरुषोत्तम ठाकुर

स्वास्थ्य के क्षेत्र की मुख्य समस्या उन स्वास्थ्य पेशेवरों की उपलब्धता की बेहद कमी है जो ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों के सबसे असुरक्षित समुदायों और शहरी इलाकों के वंचित तबके के साथ काम कर सकें। अजीम प्रेमजी स्वास्थ्य समानता फैलोशिप युवा एमबीबीएस डॉक्टरों को दुर्गम और कम संसाधन वाले भौगोलिक क्षेत्रों में सबसे वंचित लोगों के लिए काम करते हुए चिकित्सा प्रैक्टिस की जटिलताओं को सीखने का अवसर प्रदान करती है।
यह फैलोशिप डॉक्टरों को बहुतेरे अवसर और अनुभव प्रदान कर सकेगी, इसमें शामिल हैं-
- प्रख्यात अस्पतालों में अनुभवी मार्गदर्शकों के साथ काम करने अवसर
- समान सोच वाले डॉक्टरों और साथियों के साथ बंधुता का अवसर
- देश के सबसे दुर्गम हिस्सों में यात्रा का अवसर
- मानदेय ( नई जगह बसने और यात्रा व्यय के अतिरिक्त) अधिक जानकारी के लिए. यहाँ देखें।
- फैलोशिप की पूर्णता का प्रमाणपत्र
- सी एम सी वेल्लोर द्वारा आधारभूत परिवार चिकित्सा में प्रमाणपत्र कार्यक्रम में शिरकत का अवसर
- फैलोशिप के अंत में सी एम सी वेल्लोर द्वारा परिवार चिकित्सा में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PGDFM) ज्वाइन करने की संभावना
- प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर
समय-सीमा


सहभागी संस्थान
यह फैलोशिप अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन और 19 अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों का साझा प्रयास है।
हम आशा करते हैं कि इस साझे प्रयास में चयनित फैलो देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ काम करने का मौका मिलेगा। 19 सदस्य संस्थान निम्न हैं-
- आरोही, जिला नैनीताल, उत्तराखंड
- अश्विनी (एसोसियशन फॉर हेल्थ वेलफेयर इन नीलगिरी), जिला नीलगिरि, तमिलनाडू
- बेसिक हेल्थ सेर्विसेस, जिला उदयपुर, राजस्थान
- क्रिश्चियन हॉस्पिटल बिसमकट्टक, जिला रायगड़ा ओड़ीशा
- चिंचपदा क्रिश्चियन हॉस्पिटल, जिला नंदुरबार, महाराष्ट्र
- डी एफ वाई ( डॉक्टर्स फॉर यू), अनेक स्थानों पर कार्यरत (बिहार और महाराष्ट्र में भी)
- हरबर्टपुर क्रिश्चियन हॉस्पिटल, जिला देहरादून, उत्तराखंड
- जन सेवा सहयोग, जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़
- करुणा ट्रस्ट अनेक स्थानों पर कार्यरत (अरुणाचल प्रदेश, असम, कर्नाटक, मेघालय और उड़ीसा में)
- मधेपुरा क्रिश्चियन हॉस्पिटल, जिला मधेपुरा बिहार
- मकुन्दा क्रिश्चियन लेप्रेसी एंड जनरल हॉस्पिटल, जिला करीमगंज, असम
- सर्च ( सोसाइटी फॉर एडुकेशन, एक्शन एंड रिसर्च इन कम्युनिटी हेल्थ) जिला गढ़चिरौली, महाराष्ट्र
- सेवा रुरल, जिला भरूच, गुजरात
- शहीद हॉस्पिटल, जिला दुर्ग, छत्तीसगढ़
- सावित्रीबाई फुले महिला एकात्म समाज मण्डल, जिला छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र
- स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन, जिला पलक्कड, केरल
- स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट, जिला मैसूर, कर्नाटक
- स्वास्थ्य स्वराज, जिला कालाहांडी, उड़ीसा
- विवेकानंद गिरिजन कल्याण केंद्र, जिला चामराजनगर, कर्नाटक
कार्यक्रम के मुख्य तत्व
यह कार्यक्रम 12 महीने का होगा जिसे एक स्थान पर रहकर पूरा करना होगा
- ये स्थान प्राथमिक/ द्वितीयक स्वास्थ्य केन्द्र होंगे जो ग्रामीण, दुर्गम और कम संसाधन वाले जगहों या शहरों के पिछड़े इलाके के समुदायों के बीच होंगे। इनमें समुदायिक स्वास्थ्य पर फोकस होगा और ज्यादा कार्यभार होगा।
- फ़ैलोशिप के उम्मीदवारों के लिए एमबीबीएस ग्रेजुएट होना अनिवार्य है, और अपनी इंटर्नशिप और अन्य सेवा दायित्व पूरा कर चुके हों। और बेहतर हो कि उनका रजिस्ट्रेशन उनके अपने राज्य में हो।
- फ़ैलोशिप के लिए उम्मीदवारों को MBBS ग्रेजुएट होना चाहिए, जो योग्यता प्राप्ति के बाद अधिकतम 6 वर्ष तक के अनुभव वाले हों (2020 से 2025 के बीच ग्रेजुएट हुये हों)।
- कार्यक्रम में एक एंकर लोकेशन होगी, जहाँ फैलो को वर्ष के अधिकांश समय तैनात किया जाएगा, साथ ही किसी अन्य स्थान पर पर छोटी एक्सपोजर यात्रा भी होगी।
- इसके साथ ही सी एम सी वेल्लोर द्वारा परिवार चिकित्सा के सर्टिफिकट कार्यक्रम के लिए ऑनलाइन सत्र भी आयोजित किए जाएँगे और साथ ही सी एम सी वेल्लोर में भी कक्षा सत्र और अनुभव शेयरिंग सत्र भी आयोजित होंगे।
- प्रत्येक फैलो के लिए एक नामित मेंटर कार्य करेगा। फैलो और मेंटर मिलकर फैलो के लिए फोकस क्षेत्रों की पहचान करेंगे और उसके अनुसार एक लर्निंग प्लान तैयार करेंगे।
भाषा: हिन्दी, अँग्रेजी और स्थान के अनुसार क्षेत्रीय भाषा में दक्षता
अधिक जानकारी के लिए कृपया अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफ ए क्यू) पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या प्रतिभागियों को किसी तरह की आर्थिक सहायता या मेहनताना दिया जाएगा?
हाँ, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन फेलोज को मानदेय देगा। यह दो भागों में होगा – 40000 रुपए का मासिक भुगतान और 12-महीने की फेलोशिप की सफल पूर्णता पर 1.2 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, भाग लेने वाले संस्थानों के स्थानों के बीच स्थानांतरण और यात्रा व्यय भी फाउंडेशन वहाँ करेगा। ध्यान दें कि मानदेय केवल खर्चों को कवर करने के लिए है और यह वेतन नहीं है।
इस फ़ेलोशिप की शुरुआत कब होगी और इसमें कब-कब क्या होगा, इस बारे में जानकारी दें।
- आवेदन की अंतिम तिथि: 15 मार्च 2026
- चयन प्रक्रिया: फरवरी-मार्च 2026
- चयन घोषणा:10 अप्रैल 2026
- कार्यक्रम प्रारंभ: 25 मई 2026
यह कार्यक्रम कितने समय तक चलेगा?
यह कार्यक्रम 12 महीनों के लिए बनाया गया है।
इस कार्यक्रम की संरचना कैसी होगी?
कार्यक्रम में एक स्थान पर 12-महीने की तैनाती शामिल होगी, जिसमें सामुदायिक और सामाजिक संदर्भों पर क्षमतावर्धन सत्र तथा CMC वेल्लोर के आधारभूत परिवार चिकित्सा प्रमाणपत्र कार्यक्रम के लिए व्यक्तिगत सत्र सम्मिलित होंगे। कुछ क्षमता निर्माण सत्र पूर्व निर्धारित स्थान पर या ऑनलाइन हो सकते हैं।
अज़ीम प्रेमजी हेल्थ इक्विटी फ़ेलोशिप के लिए कौन आवेदन कर सकते हैं?
आवेदक MBBS स्नातक होने चाहिए जिन्होंने इंटर्नशिप और अन्य सेवा दायित्व पूरा कर लिया हो, राज्य पंजीकरण के साथ। आवेदक की स्नातक योग्यता प्राप्ति पिछले 6 वर्षों के भीतर होनी चाहिए (2020 से 2025 के बीच के बैचों में)। भारत के बाहर MBBS प्राप्त उम्मीदवारों को आवश्यक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग परीक्षाएं पास करनी होंगी। स्नातकोत्तर चिकित्सा डिग्री धारकों के आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
इस कार्यक्रम से प्रतिभागियों को क्या लाभ मिलेगा?
विविध रोगी भार वाले अस्पताल फैेलोज़ को क्लिनिकल कौशल सीखने और अभ्यास का सीधा अवसर प्रदान करेंगे। फैेलोज़ CMC वेल्लोर द्वारा संचालित प्रमाणपत्र कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। वे भारत के विभिन्न स्थापित चिकित्सा केंद्रों पर अनुभवी मेंटर्स से सीखेंगे, जो सामुदायिक स्वास्थ्य की समझ और कार्य अनुभव प्रदान करेगा।
इस कार्यक्रम से कौन-कौन से संस्थान जुड़े हुए हैं?
कार्यक्रम में निम्नलिखित 19 संस्थाएं शामिल हैं जो समुदाय में व्यापक स्वास्थ्य कार्य और स्थापित प्राथमिक/माध्यमिक स्वास्थ्य सुविधाओं वाली हैं।
- आरोही, जिला नैनीताल, उत्तराखंड
- अश्विनी (एसोसियशन फॉर हेल्थ वेलफेयर इन नीलगिरी), जिला नीलगिरि, तमिलनाडू
- बेसिक हेल्थ सेर्विसेस, जिला उदयपुर, राजस्थान
- क्रिश्चियन हॉस्पिटल बिसमकट्टक, जिला रायगड़ा ओड़ीशा
- चिंचपदा क्रिश्चियन हॉस्पिटल, जिला नंदुरबार, महाराष्ट्र
- डी एफ वाई ( डॉक्टर्स फॉर यू), अनेक स्थानों पर कार्यरत (बिहार और महाराष्ट्र में भी)
- हरबर्टपुर क्रिश्चियन हॉस्पिटल, जिला देहरादून, उत्तराखंड
- जन सेवा सहयोग, जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़
- करुणा ट्रस्ट अनेक स्थानों पर कार्यरत (अरुणाचल प्रदेश, असम, कर्नाटक, मेघालय और उड़ीसा में)
- मधेपुरा क्रिश्चियन हॉस्पिटल, जिला मधेपुरा बिहार
- मकुन्दा क्रिश्चियन लेप्रेसी एंड जनरल हॉस्पिटल, जिला करीमगंज, असम
- सर्च ( सोसाइटी फॉर एडुकेशन, एक्शन एंड रिसर्च इन कम्युनिटी हेल्थ) जिला गढ़चिरौली, महाराष्ट्र
- सेवा रुरल, जिला भरूच, गुजरात
- शहीद हॉस्पिटल, जिला दुर्ग, छत्तीसगढ़
- सावित्रीबाई फुले महिला एकात्म समाज मण्डल, जिला छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र
- स्वामी विवेकानंद मेडिकल मिशन, जिला पलक्कड, केरल
- स्वामी विवेकानंद यूथ मूवमेंट, जिला मैसूर, कर्नाटक
- स्वास्थ्य स्वराज, जिला कालाहांडी, उड़ीसा
- विवेकानंद गिरिजन कल्याण केंद्र, जिला चामराजनगर, कर्नाटक
क्या इस कार्यक्रम के तहत संबंधित मेडिकल ऑथरेटी द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र दिया जाएगा?
कार्यक्रम पूर्ण करने पर, प्रतिभागियों को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा भाग लेने वाली संस्थाओं के साथ संयुक्त रूप से जारी प्रमाणपत्र प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, CMC वेल्लोर द्वारा आधारभूत परिवार चिकित्सा का प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, बशर्ते कोर्स की सभी आवश्यकताओं की सफल पूर्ति हो।
जैसाकि बताया गया है, इस कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में रहना होगा। ऐसे में रहने की व्यवस्था की जाएगी?
तैनाती वाले संस्थान फैलोज़ के लिए पर्याप्त आवास व्यवस्था (एकल या पारिवारिक, जैसी परिस्थिति हो) प्रदान करेंगे या इसका प्रबंध करेंगे। लेकिन, सभी स्थानों पर इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती।
कार्यक्रम के पूरा होने तक प्रतिभागी को कितनी जगहों पर काम करना होगा?
प्रत्येक फैलो को एक मुख्य स्थान पर तैनात किया जाएगा, साथ ही किसी अन्य स्थान पर संक्षिप्त परिचय यात्रा होगी।
क्या दूरस्थ ग्रामीण स्थानों के कारण फैलोज़ को कौशल अभ्यास के लिए उचित चिकित्सा सुविधाओं की कमी होगी?
ये सभी स्थान (संस्थान) गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल प्रदान करते हैं। इन संस्थानों ने वर्षों में अपनी सुविधाओं का विकास किया है, और उनकी वेबसाइट्स चिकित्सा सुविधाओं व कार्यक्षेत्र का एक अंदाजा देती हैं।
क्या इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी छुट्टी ले सकते हैं?
हाँ, छुट्टी का प्रावधान है। सटीक अवधि व विवरण तैनाती स्थान पर चर्चा के बाद साझा किए जाएंगे।
एक लोकेशन पर एक बार में एक ही प्रतिभागी काम करेंगे?
फैलोज़ उस स्थान की चिकित्सा टीम का हिस्सा होंगे। ज़रूरत और चयनित आवेदकों की संख्या के आधार पर एक स्थान पर 1-2 फेलोज हो सकते हैं।
क्या इस प्रोग्रैम के पूरा होने के बाद प्लेसमेंट का मौका भी दिया जाएगा?
आवश्यकताओं व परस्पर अनुकूलता के आधार पर, प्लेसमेंट संबंधी चर्चा आपके कार्यक्रम समापन का हिस्सा हो सकती है।
क्या कोई प्रतिभागी बीच में यह कार्यक्रम छोड़ सकता है?
हमारी सीटें सीमित हैं और कार्यक्रम आपसे पूरे 12-महीने की प्रतिबद्धता की अपेक्षा करता है। किसी असंभावित परिस्थिति में यदि कोई फैलो कार्यक्रम छोड़ना चाहता है तो आवश्यक नोटिस अवधि के बाद छोड़ सकते हैं। ऐसी स्थिति में आनुपातिक लाभ प्राप्त होंगे। कार्यक्रम छोड़ने पर CMC वेल्लोर कार्यक्रम जारी नहीं रख सकेंगे।
क्या यह एक विशेष फेलोशिप या रेज़ीडेंसी डॉक्टर जैसा ही प्रोग्रैम हैै?
यह विशेष फेलोशिप या रेजिडेंसी से भिन्न है। इस कार्यक्रम में 19 भागीदार संस्थानों में क्लिनिकल व सामुदायिक कार्य का समृद्ध अनुभव प्रदान किया जाएगा, जो रोग के कारणों, प्रस्तुति, चिकित्सा ज्ञान के संदर्भ विशेष में प्रयोग को समझने में सहायक होगा। यह सब रोगियों, उनके परिवार व समुदाय के लाभ हेतु, उपयुक्त प्रौद्योगिकी व औषधियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए किया जाएगा।
