हम शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने और उसमें सभी की हिस्सेदारी बढ़ाने के मकसद से काम करते हैं।
हम कई तरीकों से स्कूल शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हम सीधे तौर पर सरकारी शिक्षकों, शिक्षा विभाग में ज़िम्मेदारी वाले पदों पर काम करने वाले पदाधिकारियों और हितधारकों के साथ मिलकर काम करते हैं। यह काम शिक्षकों की और ज़्यादा बेहतर ढंग से सिखाने में मदद के लिए करते हैं, ताकि विद्यार्थी बेहतर-से-बेहतर ढंग से सीख सकें।

अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन का मकसद एक न्यायसंगत, बेहतर, मानवीय, और सस्टेनेबल समाज निर्माण करने की दिशा में योगदान देना है। इस उद्देश्य को अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय और अज़ीम प्रेमजी स्कूल ज़मीनी स्तर पर साकार करते हैं। ये संस्थान शिक्षा के ज़रिए समाज में सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने में योगदान दे रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में हम अपने फ़ील्ड संस्थानों के ज़रिए ख़ुद ज़मीनी स्तर पर काम करते हैं।
स्कूली शिक्षा
अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन का सफ़र स्कूली शिक्षा के अलग-अलग कार्यक्रमों में भागीदारी के साथ शुरू हुआ। हमने 10 वर्षों तक स्कूली शिक्षा में कई तरह के प्रोग्रैम्स के ज़रिए काम किया। इन अनुभवों के बाद हमने सरकारी स्कूली शिक्षा सिस्टम को मज़बूत बनाने के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले संस्थान खड़े करने की शुरुआत की। ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली हमारी टीमें शिक्षक और हेड-शिक्षक जैसे शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के साथ मिलकर काम करती हैं। हमारे संस्थान सीखने-सिखाने या अध्ययन-अध्यापन पर सीधे प्रभाव डालने वाले हितधारकों के साथ जुड़कर और लगातार काम कर रहे हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए हमने जो समझ, अनुभव और जानकारी हासिल की है, उसी के आधार पर हम स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
हमारा मानना है कि समाज और व्यक्ति के संपूर्ण विकास के लिए शिक्षा बेहद ज़रूरी इंसानी कवायद है। समाज और उसके हर एक व्यक्ति की बेहतरी के लिए की जाने वाली शिक्षा की महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया में सभी का साथ आना ज़रूर है। शिक्षा व्यक्ति की सृजनात्मक क्षमता, रचनात्मक ज्ञान और नैतिक मूल्यों का विकास करने वाली होती, जिससे बेहतर समाज का निर्माण होता है।
हम यह भी समझते हैं कि शिक्षा गहरी मानवीय-सामाजिक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थी, शिक्षक, स्कूलों के मुखिया और अन्य लोगों की काफ़ी अहमियत है। इसलिए, शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए इंसानी कौशल व क्षमताओं बेहतर बनाना बेहद ज़रूरी है।
स्कूल का सांस्कृतिक माहौल भी पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या का बेहद अहम हिस्सा है। हम मानते हैं कि शिक्षा और शिक्षा की प्रक्रिया पर विद्यार्थी के घर और सामाजिक के वातावरण का सीधा और गहरा असर होता है। विद्यार्थी के सामाजिक वातावरण में उसे मिलने वाले संसाधनों, खान-पान और पालन-पोषण या देखभाल के तरीके भी शामिल हैं, जिनका विद्यार्थियों के सीखने पर प्रभाव देखा जा सकता है। इनमें होने वाली किसी भी कमी को स्कूल पूरा करते हैं और उन्हें यह करना भी चाहिए।
इस जानकारी और समझ के आधार पर स्कूली शिक्षा हम काम को आगे बढ़ाते हैं। इसलिए स्कूली शिक्षा में हमारे काम के कई आयाम या पहलू हैं।
हमने शिक्षा व्यवस्था के पाठ्यक्रम विकास और नीति निर्माण से लेकर परीक्षाओं में सुधार लाने और मानव संसाधन को विकसित करने जैसे हर एक पहलू में योगदान दिया है।
हम आंगनवाड़ी व स्कूल से लेकर राज्य व राष्ट्रीय स्तर के संस्थान तक में अपना योगदान देना चाहते हैं। इसके माध्यम से हमने मानवीय कौशल व क्षमताओं का विकास करने का ध्येय निर्धारित किया है। हमारे फ़ील्ड संस्थान ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। इन फ़ील्ड संस्थानों के ज़रिए हम कौशल विकास के कामों को अंजाम दे रहे हैं। हमारे सभी कामों की तरह, शिक्षा के क्षेत्र में भी हम राज्य और केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं।
शिक्षकों में कौशल का विकास करने और उनकी क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए उनसे जुड़कर लगातार काम करना पड़ता है। हमने शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले सभी कर्मचारियों और स्कूली नेतृत्व की हैसियत में काम करने वालों लोगों में कौशल विकास के लिए भी यह नज़रिया अपनाया है।
आज नौ अज़ीम प्रेमजी स्कूल अपनी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। इन स्कूलों से हमें स्कूली शिक्षा को और बेहतर बनाने व सुधार लाने के लिए बहुमूल्य अनुभव मिलते हैं।
हम राज्य सरकारों और उनकी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करते हैं। हम ज़िला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और कई परीक्षा बोर्डों के साथ साझेदारी में कई काम किए हैं, कर रहे हैं। इस भागीदारी से हम अपनी क्षमताओं को बढ़ाने और अपनी फ़ील्ड में काम कर रही संस्थानों को बेहतर बनाने में मदद लेते हैं। इसके ज़रिए हम ज़मीनी स्तर पर बेहतर-से-बेहतर काम करने योग्य बनते जा रहे हैं।
हम पाठ्यक्रम विकास, स्कूली किताबों के विकास, शिक्षक प्रशिक्षण, परीक्षा के आयोजन-नियोजन और नीतियाँ बनाने में कई राज्य सरकारों व केंद्र सरकार की मदद करते हैं। देश के सात राज्यों में हमारे फ़ील्ड संस्थान काम कर रहे हैं। साथ ही, हम दूसरे 17 राज्यों में स्कूल व्यवस्था के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
हम शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण विषयों पर शोध व अनुसंधान करते हैं। इन्हें हम प्रकाशित कराते हैं और सभी के लिए उपलब्ध कराते हैं।
विश्वविद्यालय
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के पहले कैंपस की स्थापना 2010 में बेंगलूरु में की गई। भोपाल में विश्वविद्यालय का दूसरा कैंपस 2023 में शुरु किया गया। विश्वविद्यालय का तीसरा कैंपस जल्द ही राँची में शुरु होगा।
शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए योग्य और प्रतिबद्ध लोगों बढ़ावा देने के लिए अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय में कई तरह के कार्यक्रम शुरु किए गए हैं। हमारे एमए प्रोग्रैम में मास्टर्स इन एजुकेशन (शिक्षा में एमए), मास्टर्स इन अर्ली चाइल्डहुड केअर एण्ड एजुकेशन (आरंभिक बचपन में देखभाल और शिक्षा), डिप्लोमा इन इन्क्लुसिव एजुकेशन (समावेशी शिक्षा में डिप्लोमा), टीचिंग चिल्डन विथ लर्निंग डिसाब्लेटी (सीखने में असमर्थ बच्चों की शिक्षा), ईसीई और एजुकेशनल असेसमंट (शैक्षणिक मूल्यांकन) शामिल हैं। हमारे स्नातक प्रोग्रैम्स में विज्ञान और शिक्षा के स्नातक प्रोग्रैम भी जारी हैं।




