शिक्षकों के साथ काम करना

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शिक्षा के क्षेत्र में हमारे काम का प्राथमिक लक्ष्य सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को मदद करना है, ताकि वे बेहतर ढंग से पढ़ा सकें

हमारी कोशिश विषय की सामग्री, पढ़ाने के तरीके और नज़रिए में उनकी क्षमता को बढ़ाना है।

जिन ज़िलों में हम काम करते हैं, उन ज़िलों के प्रमुख कस्बों में हमने शिक्षक शिक्षा केंद्र (टीएलसी) स्थापित किए हैं, जहाँ हम शिक्षकों के साथ बातचीत करते हैं। ये केंद्र सरकारी स्कूलों और निजी जगहों बनाए गए हैं। ये शिक्षक शिक्षा केंद्र शिक्षकों को अकादमिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए जगह उपलब्ध कराते हैं। इन गतिविधियों में वर्कशॉप, चर्चाएँ, वोलैंटरी टीचर फोरम, मेले, और आदान-प्रदान के सत्र शामिल हैं।

इन केंद्रों में एक भरी-पूरी और व्यापक लाइब्रेरी भी है। इसमें शिक्षकों के लिए पुस्तकों, पत्रिकाओं, पाठ्य-पुस्तकों, समाचार पत्रों, शिक्षण संसाधनों, विज्ञान प्रयोगशाला उपकरणों, इंटरनेट कनेक्शन वाले कंप्यूटरों और सीखने-सिखाने की सामग्री के साथ और भी कई अन्य सुविधाएँ मौजूद हैं।

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हमारे काम के क्षेत्रों में शिक्षकों, हेड-शिक्षकों और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले अन्य लोगों के साथ लगातार संपर्क शामिल है। हमारा ध्यान ज़मीनी स्तर के कामों को संभव बनाने वाले कार्यों पर भी है। इसमें नौकरी करते हुए प्रशिक्षण ले रहे शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल बनाना, स्कूल पाठ्यक्रम व पाठ्य-पुस्तक तैयार करना, सीखने की सामग्री तैयार करना आदि शामिल है। हम स्कूल के माहौल में रोज़मर्रा के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए हेड-शिक्षकों के साथ काम करते हैं, जैसे, सुबह असेंबली आयोजित करना, पुस्तकालय में रिडिंग कॉर्नर बनाना और खेलकूद को शामिल करना आदि।

हम जॉइंट डाइरेक्टर, SCERT/ DIET फैकल्टी जैसे अन्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्य क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करना चाहते हैं। यह सहायता शिक्षाशास्त्र, दृष्टिकोण, नीति और शोध पर ध्यान केंद्रित करने के रूप में होगी।

हम ख़ुद शिक्षकों के साथ मिलकर ज़मीनी स्तर पर लगातार प्रारंभिक बाल शिक्षा (ईसीई) के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं।

2012 में फ़ाउण्डेशन ने तेलंगाना के संगारेड्डी ज़िले में आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ मिलकर शुरुआती बाल शिक्षा पहल (ईसीई) की शुरुआत की। शुरुआत में ईसीई कार्यक्रम का ध्यान आंगनवाड़ी शिक्षकों की क्षमता को बढ़ाने पर था। इस ओर ध्यान इसलिए दिया गया था, ताकि, शिक्षकों को 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाली शुरुआती बाल शिक्षा की दिशा में काम करने में मदद मिल सके। यह कार्यक्रम भारत सरकार की एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के तहत हुआ था।

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ईसीई पाठ्यक्रम बच्चों के समग्र विकास के सिद्धांतों पर आधारित है। इस तरह, इस पाठ्यक्रम में उनके जीवन से जुड़ी हुई रुचियों और विषयों पर ध्यान दिया जाता है। इसलिए, यह पाठ्यक्रम फ़ाउण्डेशन के केंद्र में ही विकसित किए जाते हैं और आंगनवाड़ी केंद्रों में लागू किए जाते हैं।

संगारेड्डी में मिले अच्छे अनुभव के कारण हमने इस काम को उन राज्यों और ज़िलों में भी आगे बढ़ाया, जिनमें हम काम करते हैं। हमारी टीमें अब अच्छी क्वालिटी की ईसीई देने में मदद के लिए भारत भर में काम कर रही हैं।

हमने ईसीई में ज़रूरी पाठ्यक्रम से जुड़े हुए काम को भी पूरा कर लिया है और अर्ली लर्नर असेसमेंट (ईएलए) नाम की हैण्डबुक तैयार कर ली है। यह हैण्डबुक 3-5 वर्ष के बच्चों का सही ढंग से विकास हो रहा है या नहीं, इसे जाँचने में सहायता करेगी।

© 2026 अजीम प्रेमजी फाउंडेशन. सर्वाधिकार सुरक्षित।
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