इतिहास
फ़ाउण्डेशन की स्थापना (भारतीय कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 25 के तहत) 9 मार्च 2001 को हुई थी। तब से अज़ीम प्रेमजी ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा कल्याणकारी निधि के लिए दान किया है। जनवरी 2023 तक इसका मूल्य लगभग 2,40,000 करोड़ रुपए आँका गया था। यह निधि हमारी विभिन्न पहलों को मदद देने वाले वित्तीय आधार के रूप में काम करती है।
फ़ाउण्डेशन की शुरुआत को अज़ीम प्रेमजी और हमारे संस्थापक सीईओ दिलीप रांजेकर के बीच हुई व्यापक चर्चाओं से जोड़कर देखा जा सकता है। इन चर्चाओं का नतीजा एक श्वेत पत्र के रूप में सामने आया। इसने संस्था के लक्ष्यों की बुनियाद तैयार की। विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों की गहरी छानबीन के बाद प्राथमिक शिक्षा, फ़ाउण्डेशन की कोशिशों के केन्द्र बिंदु के रूप में उभर कर सामने आए। हमने शिक्षा को एक बुनियादी चुनौती के रूप में देखा। हमने पाया कि सामाजिक और आर्थिक असमानता से निपटने के लिए शिक्षा ज़रूरी माध्यम है। यही सोच आज भी हमारे सफ़र को जारी रखने के लिए प्रेरित करती है।

अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए शुरुआत से ही हम सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करते रहे हैं। हम आज भी सरकारी तंत्र के साथ मिलकर परिवर्तन के प्रभावी, लचीले तथा अनुकरणीय मॉडलों को पेश करते हुए काम कर रहे हैं।
विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ ही हम अध्यापक शिक्षा की गुणवत्ता को भी महत्त्वपूर्ण मानते हैं। हम सरकारी स्कूल सिस्टम के भीतर अलग-अलग कार्यक्रमों और हस्तक्षेपों के ज़रिए अपने ज्ञान और कौशल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों और अध्यापन से जुड़े अन्य लोगों की कोशिशों को लगातार मदद देते हैं।
विकास क्रम
अज़ीम प्रेमजी स्कूल
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलूरु
हमारा पहला विश्वविद्यालय 2010 में शुरु किया गया था। यह विश्वविद्यालय शिक्षा और विकास क्षेत्रों में योग्य, जानकार पेशेवरों को बढ़ावा देने और प्रशिक्षण की एक बेहतरीन जगह की तरह शुरु किया गया है।
और पढ़ेंफ़ील्ड संस्थाएँ
ज़मीन स्तर पर काम करते हुए हम भारत में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं। इस काम में हम देश के पिछड़े इलाकों पर ज़्यादा ध्यान देते हैं।
और पढ़ेंभोपाल में अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय
हमारा दूसरा विश्वविद्यालय भोपाल में शुरु हो चुका है। अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय भोपाल में डिप्लोमा और डिग्री प्रोग्राम के लिए प्रवेश दिए जा रहे हैं।और पढ़ेंग्रांट्स
चित्र साभार - पुरुषोत्तम ठाकुरस्कूली शिक्षा में प्रोग्राम स्तर पर का हस्तक्षेप

इस दौरान हमने कई कार्यक्रमों के ज़रिए स्कूलों तक बच्चों की पहुँच, उनके दाखिले और उन्हें शिक्षा में बनाए रखने को बढ़ावा देने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने पर काम किया। और पढ़ें
स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में आगे बढ़ते हमारा काम
इस क्षेत्र में अपने काम को आगे बढ़ाते हुए हमने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मज़बूत बनाने के लिए मदद करने से शुरूआत की । यह अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल में पब्लिक हेल्थ (एमपीएच) में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के साथ-साथ जारी है। हम अस्पतालों और एनजीओ के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं, ताकि सबसे कमज़ोर समुदायों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाई जा सकें।अज़ीम प्रेमजी स्कॉलरशिप की शुरुआत
सीएमसी वेल्लोर के साथ भागीदारी (स्वास्थ्य)

अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन ने क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर के साथ भागीदारी कायम की है। इस भागीदारी के तहत सीएमसी के चित्तूर कैंपस में एक नया मेडिकल कॉलेज सहित अस्पताल शुरु किया जाएगा। इस अस्पताल सहित मेडिकल कॉलेज में ख़ासतौर पर वंचित समुदाय के लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएँ और इलाज उपलब्ध करवाया जाएगा।
अधिक जानकारी के लिए क्लिक करें
कोविड-19 के चलते भारत में स्वास्थ्य और अन्य तरह की समस्याएँ सामने आईं। इस आपदा से बाहर निकलने के लिए हमने समाज-लोगों की आगे बढ़कर मदद की।
देश के विकास में एक महत्त्वपूर्ण और लंबे समय तक योगदान देने के नज़रिए और मकसद के साथ अज़ीम प्रेमजी ने 2001 में फ़ाउण्डेशन की शुरुआत की थी।