इस फिल्म में स्रीमा नज़रिए से अज़ीम प्रेमजी शिशु घर में बिताए गए एक दिन को दिखाया गया है। इसमें हम देख सकते हैं कि किस प्रकार बच्चे शिशु घर में एक सुरक्षित और पोषणयुक्त महौल में अपना दिन बिताते हुए साथ मिलकर खेलते-सीखते और पोषणयुक्त स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।