अज़ीम प्रेमजी स्कूल, बाड़मेर की स्थापना वर्ष 2019 में की गई थी। यह स्कूल नर्सरी से लेकर 8वीं कक्षा तक की गुणवत्तापूर्ण और बेहतरीन स्कूली शिक्षा निःशुल्क प्रदान करता है।
यह स्कूल राजस्थान राज्य शिक्षा बोर्ड से संबद्ध है। हमारे स्कूल बुनियादी साक्षरता और गणित के कौशलों को विकसित करने के ठोस प्रयास किए जाते है। हम स्कूल के वातावरण को सीखने-सिखाने के लिए सुरक्षित, समावेशी, खुला और ख़ुशहाल बनाने पर ज़ोर देते हैं। हमारा स्कूल समाज के सभी स्तरों, सभी तरह के सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले और सभी धर्मों के विद्यार्थियों के लिए खुला है। हम शिक्षा के ज़रिए समानता व सामाजिक न्याय पर आधारित मानवीय, न्यायपूर्ण और सस्टेनेबल समाज बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा स्कूल इसी उद्देश्य के प्रति समर्पित है।

हमारा मानना है कि बेहतर ढंग से सीखने-सिखाने के लिए एक बेहतर वातावरण की ज़रूरत होती है। इस तरह के वातावरण में विद्यार्थी और शिक्षक आपस में खुलकर विचारों की लेन-देन करें, हर एक व्यक्ति दूसरों की भावनाओं की कद्र करते हुए अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करें, सभी आपस में मिल-जुलकर ज़िम्मेदारी के साथ काम करें। इसके लिए हर एक व्यक्ति का दुर्भावनाओं, गलतफ़हमियों, सामाजिक अड़चनों, डर और अहंकार से आज़ाद होना बेहद ज़रूरी है। हमारे स्कूल में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में 30 विद्यार्थियों पर 1 शिक्षक का अनुपात है। शुरुआती बाल शिक्षा (ECE) की कक्षाओं में 15 बच्चों पर एक शिक्षक का अनुपात रखा गया है।
बच्चों के बारे में हमारी सोच
हम मानते हैं कि सभी बच्चे सीखने के लिए सक्षम होते हैं। सभी बच्चे अपनी अनूठी जिज्ञासा, भाषा और सांस्कृतिक दृढ़ता के साथ आते हैं। जब बच्चों को सम्मान व आदर दिया जाता है और उन्हें सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाता है, तो वे फलते-फूलते हैं, कामयाब होते हैं, आगे बढ़ते हैं। बच्चे कई तरीकों से सीखते हैं। बच्चे बातचीत से सीखते हैं। बच्चे चीज़ों को समझते हुए अनुभवों के ज़रिए सीखते हैं। बच्चे चीज़ों को बनाते हुए, नई चीज़ों का निर्माण करते हुए सीखते हैं। बच्चे हलचल करते हुए सीखते हैं। बच्चे अपने आस-पास के बच्चों से सीखते हैं। बच्चे अपने हर एक साथी से सीखते हैं। हर एक बच्चा अपने तरीकों से और अपनी गति से सीखता है। बच्चों का शारीरिक विकास उनके भावनात्मक और संज्ञानात्मक विकास में मदद करता है। हम यह भी मानते हैं कि बच्चे परिस्थितियों के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं और एक ही बच्चा किसी परिस्थिति में अलग-अलग समय पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे सकता है। इन वजहों से हम सीखने-सिखाने के लिए ज़रूरत के मुताबिक बदलने योग्य और ज़िम्मेदारी वाला नज़रिया अपनाते हैं।
हमारे स्कूलों में सीखने-सिखाने की प्रक्रिया
कक्षा में पढ़ाने की प्रक्रिया: हम सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में बच्चों को पूरी तरह शामिल करते हैं। उन्हें हम कई तरह की गतिविधियों के ज़रिए सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाते हैं। इन गतिविधियों में हम विद्यार्थियों को सवालों के जवाब ढूँढ़ने, तरह-तरह से खोजबीन करने, बातचीत या चर्चा करने, एक-दूसरे के विचारों और अवधारणाओं को समझने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इन गतिविधियों में हम विद्यार्थियों को अलग-अलग तरह की चुनौतियाँ देते हैं, बच्चे इनसे गुज़रते हुए अनुभवों के माध्यम से सीखते हैं।
सृजनात्मक अभिव्यक्ति पर ध्यान: हम सीखने-सिखाने में चित्रकारी, संगीत, नाटक, शारीरिक शिक्षा, काग़ज़-मिट्टी से तरह-तरह की कलाकृतियाँ बनाने जैसी साथ मिलकर करने वाली कलाओं की गतिविधियों को काफ़ी महत्व देते हैं। हम इसे शिक्षा के लिए ज़रूरी मानते हुए इसे वैकल्पिक या अतिरिक्त गतिविधियाँ नहीं मानते, बल्कि हमारा विश्वास है कि कलाओं के विभिन्न रूप बच्चों के सर्वांगीण विकास का ज़रूरी हिस्सा है। यह सही है कि कलाओं और शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से बच्चों की रचनात्मकता, संवेदनात्मक अभिव्यक्ति और साथ मिलकर काम करने के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है। इन गतिविधियों से शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक सेहत को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
साथियों के साथ मिल-जुलकर सीखने को बढ़ावा: मिल-जुलकर सीखने से विद्यार्थी आपस में कई जटिल अवधारणाओं और व्यवहारों को बेहतर तरीके से समझते-समझाते हैं। विद्यार्थी आपस में एक-दूसरे को कई मुश्किल चीज़ों को आसान तरीके से समझा सकते हैं। ऐसे सीखने में सिखाने वाले विद्यार्थी और सीखने वाले विद्यार्थी, दोनों की समझ अधिक बेहतर बनती है। इसके अलावा, वे एक-दूसरे को आसानी से उपलब्ध भी होते हैं और खुलकर सीख भी सकते हैं। हम कक्षा में सीखने का आपसी सहयोगात्मक माहौल बनाने की कोशिश करते हैं, जिसमें प्रतिस्पर्धा की जगह सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाता है। कक्षा में इस तरह की संस्कृति की वजह से विद्यार्थी सीखने के सफ़र में एक-दूसरे सहारा बनते हैं, साथ चलते हैं। सीखने की प्रक्रिया सिर्फ़ शिक्षक और विद्यार्थियों के संबंधों तक ही सीमित नहीं होती है। हमारे शिक्षक बेहतर संवाद को आगे बढ़ाने की लगातार कोशिश करते हैं, सम्मानपूर्ण संवाद के लिए अवसर बनाते हैं, उसके लिए नियम बनाते हैं और विद्यार्थियों की सोच व चिंतन को सही दिशा देते हैं। विद्यार्थियों का समूह सीखना, समूह में सक्रिय रहना, समूह में अपने विचारों के प्रस्तुत करना और समूह में दूसरों के विचारों को समझना- इस सबके लिए हमारे शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका अदा करते हैं।
स्कूल को काम-काज में विद्यार्थी भागीदारी: स्कूल के नियमित कामों में बच्चों की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए और सीखने का बेहतर माहौल बनाने की ज़िम्मेदारी में विद्यार्थियों की भूमिका होनी चाहिए। ये बात, हमारे इस दृढ़ विश्वास से निकली है कि बच्चा भी किसी अन्य व्यक्ति की तरह सक्षम होता है और उसकी राय, मान्यताओं और रुचियों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, उसके हर एक काम को महत्त्व दिया जाना चाहिए। जब बच्चों पर विश्वास कर उनको ज़िम्मेदारी सौंपी जाती है, तो उनमें काम के लिए अपनापन, जवाबदेही और नेतृत्व की भावना पैदा होती है। इन्हीं भावनाओं को निभाते हुए, इन बच्चों में नेतृत्व का विकास होता है। इसके लिए हम स्कूल सभाओं और विद्यार्थियों की समितियों को बढ़ावा देते हैं।
बुनियादी सुविधाएँ
- डे बोर्डिंग स्कूल 3 एकड़ में बना है
- कक्षाओं के लिए शानदार कमरे और ज़रूरी सुविधाओं से युक्त पुस्तकालय है।
- डायनिंग हॉल: इसमें विद्यार्थियों को नि:शुल्क और पोषक मध्याह्न भोजन दिया जाता है।
- प्रयोगशालाएँ: विज्ञान, गणित और समाज विज्ञान की सारी ज़रूरी सुविधाओं से युक्त प्रयोगशालाएँ मौजूद हैं।
- संगीत और कलाओं के लिए अलग कमरे हैं।
- रिसोर्स रूम और कम्प्यूटर लैब।
- रिसोर्स रूम और कम्प्यूटर लैब।
- खेल-कूद की सुविधाएँ: स्कूल में स्पोर्ट रूम, बड़ा मैदान और कई खेलों की सामग्री उपलब्ध है।
